दोस्तों नमस्कार
आज काफी दिन के बाद उपस्थित हूँ,कारण था तबियत खराब होना,तबियत कितनी भी खराब हो पर दैनिक कार्य तो करने ही पड़ते हैं,घर में कोई भी बीमार हो तो घर अस्त व्यस्त हो ही जाता है,पिछले दिनो घर के सभी लोग एक एक कर बीमार पड़े तो दिमाग और शरीर पर ज्यादा बोझ आ जाता है,पर आप मित्रों का आभार है कि सब परेशानियां हल हो जाती हैं आपके इस प्यार के लिए धन्यवाद शब्द काफी छोटा है,ये प्यार सदैव बनाये रखियेगा

दोहा गीतिका
जब उसने मुझसे कहा,घूंघट के पट खोल |
लज्जा से पलके झुकी ,रक्तिम हुए कपोल
प्रथम मिलन की रात थी,शब्द हो गये मौन |
खामोशी के बीच थे,बस धड़कन के बोल ||
दिल की धड़कन बढ गई,महके गज़रे,फूल |
आलिंगन के, प्यार के,थे वो पल अनमोल ||
लजा रही थी चाँदनी,चंदा था मदहोश |
खन खन के संगीत पर,मन था डाँवाडोल ||
अधरों से लाली हटी,मुख से बिन्दी गोल |
हार और श्रृंगार का,रहा न कोई मोल ||
जीवन के पथ पर मिले,दो राही अन्जान |
जीवन भर को बंध गया,रिश्ता एक सुडौल ||
शालिनी शर्मा
करी बगावत आँख ने,निंदिया से कल रात |
जाने किससे रात भर,करी जाग कर बात ||
शालिनी शर्मा
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