नमस्कार दोस्तों
फिर से बुलाया वसुधा जी ने काव्य पाठ के लिए
मुक्तक
धनक ~बहुभाषी काव्यगोष्ठी में,बहुत ही सुन्दर काव्यपाठ गोष्ठी मैने जो रचना पढ़ी वो वीडियो यहाँ अपलोड की है आपके लिए,
दोस्तों आपका प्यार मिल रहा है तो माँ शारदे की कृपा से अब एक पहचान बनने लगी है काव्य जगत के लोग पहचानने लगे हैं
बहुभाषी काव्य गोष्ठी 'धनक' में 23 कविगण ने हिन्दी, अवधी, भोजपुरी, अंगिका, राजस्थानी, कुमाऊँनी, ब्रज भाषा, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी में सरस काव्य पाठ किया।
बटे हुए हैं इसी लिए वो मिलकर काट और छांट रहे |
वो अपने बच्चो को खंजर और बन्दूके बांट रहे
सिर्फ एक होकर ही हम दुश्मन को मार भगायेगें
कृष्ण सुदर्शंन चक्र लिए कायर क्यों हो कह डांट रहे
शालिनी शर्मा
हमें छोड़कर वो हुआ,किसी और का प्यार |
मेरे जैसा ही तुझे,मिले सनम इस बार ||
शालिनी शर्मा
मुक्तक
मुंह फेर कर चल दिये,बनकर वो अन्जान
जान और पहचान भी,अब तो है अहसान
झुकने को कोई नहीं, दोनो में तैयार
रूठ गया किस बात पर,कारण तो तू जान
शालिनी शर्मा
हमें छोड़कर वो हुआ,किसी और का प्यार |
मेरे जैसा ही मिले तुझे सनम इस बार ||
शालिनी शर्मा
साजिश वो करते रहे,हरदम मेरे साथ |
भोलेपन के आवरण,का खंजर ले हाथ ||
शालिनी शर्मा
जब किसी बहुत ही नकदीकी और प्रिय व्यक्ति से अनबन हो जाये और बात इतनी बढ़ जाये कि बोलचाल बन्द हो जाये,एक दूसरे को देखकर रास्ता बदलना शुरू हो जाये तो आप इतने तनाव में आ सकते हैं कि आपके दिमाग का सन्तुलन बिगड़ने की नौबत आ सकती है खास कर आपके कार्य स्थल पर,आपके सहयोगी आपकी सफलताओं को पचा नहीं पाते,एक सफल आदमी दो स्तर पर महनत करता है एक तो सफल होने के लिए दूसरे सफल होने से उत्पन्न परेशानियों को कम करने के लिए,सफल होने की कई जगह बहुत बड़ी कीमत चुकाता है व्यक्ति, ये सही है जितनी ऊंची पोजीशन उतना ही अधिक तनाव,कितनी घुटन होती है कि जिसे पाने के लिए हमने अपनी पूरी जिंदगी लगा दी,वो चीज आपको मिले ही न,या वो चीज आपके सामने किसी और को दे दी जाये,आपकी सबसे प्रिय चीज खो गई पर आप रो नहीं सकते,क्रोध नहीं कर सकते,चिल्ला नहीं सकते बस आपको सभ्य होने का दिखावा करना है,एक दिखावा बन कर रह जाती है जिन्दगी
मुझे छोड़कर वो हुआ,किसी और का प्यार |
मेरे जैसा ही मिले, तुझे सनम हर बार ||
शालिनी शर्मा
ताकत वाले के यहाँ, हैं अवगुण सब माफ |
होते हैं कमजोर के, सारे लोग खिलाफ ||
शालिनी शर्मा
पीड़ा उनकी जानिए,और पूछिए हाल |
जिन्हे पेट भर दो घड़ी,मिली न रोटी दाल ||
शालिनी शर्मा
झूठ बोलकर न्याय को,धोखा देते लोग |
सच को सच कह कर करें,निर्णय में सहयोग ||
शालिनी शर्मा
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