रूठ गये वो रंग से,कैसे रंग लगायें
रंगहीन जीवन हुआ,रंग उन्हे न भायें
होली उनकी हो रही,जिनके घर आबाद
जहां रोग हों कष्ट हों,कैसे रंग उड़ायें
पर एक शाम ऐसी भी सजी जहां लगा ही नहीं कि किसी को कोई दुख भी है,न दुख न रंजिश बस प्रेम ही प्रेम
सनातन का सन्देश है वसुधैव कुटुम्बकम
दोहे
मुझसे रंग कहने लगे,किस रंग से है प्यार
मैने बोला मांग का,जिस रंग से श्रृंगार
जब कड़वाहट भूल कर,दी प्यारी मुस्कान
फिर होली पर रंग से,सजे मिले दालान
जीवन भर को दे दिया,जब हाथों में हाथ
सब रंगो का सार है साजन तेरा साथ
साजन ने जब भी मला,मुख पर लाल गुलाल
रंग हया का गाल को,कर देता है लाल
रंग बिरंगी ज़िन्दगी,है खुशियों की खान
हर्ष,और उल्लास है,होली की पहचान
होली पर हँस कर किया,सजना संग हुडदंग
देवर धोखे से मुझे,पिला गया है भंग
शालिनी शर्मा
होली में रंगो से नहाना अच्छा लगता है
किसी के घर पर आना जाना अच्छा लगता है
रंगे पुते भूतो से चेहरे दीखते हैं जोकर जैसे
देख उन्हे हँस हँस के अपना पेट फुलना अच्छा लगता हैं
गीत
होली खेल रहे नन्दलाल
ढ़ोलक बाजे उड़े गुलाल
राधा सखियों संग आयी
होली की मस्ती छायी
कान्हा के संग में है ग्वाल
राधा का मुखड़ा गोरा
मुख रंगता काला छोरा
ड़ाले रंग गुलाबी लाल
रंग भर पिचकारी मारी
राधा के संग बनवारी
नाचे दे ढ़ोलक पे ताल
बरसाने की ये होली
राधा संग हंसी ठिठोली
करते कृष्णा,रंगते गाल
बहुत सुन्दर,भव्य,आलीशान,मनोरंजक,आत्मीय और रंग बिरंगा कार्यक्रम रहा,इतना अच्छा और स्वादिष्ट नाश्ता,इतना अच्छा संचालन इतने अच्छे फोटो ग्राफ,सभी का इतना अच्छा काव्यपाठ कुल मिलाकर कार्यक्रम हर स्तर पर अच्छा था इतने आलीशान कार्यक्रम का हिस्सा बनाने के लिए बहुत बहुत आभार वैभव भैया,हार्दिक शशुभकामनाएँ एंव बधाईए🙏🙏
वैभव जी का बहुत बहुत आभार
आपका संचालन हमेशा ओज और स्फूर्ति से परिपूर्ण होता है जो हमेशा हमें सनातनी होने पर गौरव अनुभव करवाता है। ,प्रिय चेतना की फोटोग्राफी,आदरणीय दर्शन जी की व्यवस्था और उनका प्यार अतुलनीय और अनुकरणीय है



























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