हमको उम्र चुरानी होगी
तब महफूज जवानी होगी
जिन यादों में बचपन होगा
वोही याद सुहानी होगी
कैसे काम चलेगा रोकर
पीड़ा दूर भगानी होगी
लक्ष्य कोई दुश्वार नहीं है
मन्जिल हमको पानी होगी
हारे या जीते कोई भी
नैतिकता अपनानी होगी
सब चीखों को सुनना सीखो
दुख की एक कहानी होगी
शालिनी शर्मा
[बर्बादी के सब रस्ते
नफरत से होकर जाते हैं,
आंख बंद होती हैं जिनकी
सदा ही ठोकर खाते हैं,
गहरी नींदों में सोने से
काम नहीं चलने वाला,
सुनो हमेशा अच्छा कल,हम
आज को खोकर पाते हैं ||
शालिनी शर्मा
[
लाश खोजने के लिए,जुटा सभी सामान |
पर जिन्दा न बचा सका,सिस्टम इक इन्सान ||
शालिनी शर्मा
हाथ जोड़ कर आपका,वन्दन,नमन,प्रणाम |
हर पंक्ति पर आपका,स्नेह मिले अविराम ||
झोली फैला कर खड़ी,दे दो आशिर्वाद |
कुछ भी अच्छा हो लिखा,मिले तालियां,दाद ||
ये महफिल आबाद है,आप सभी से आज |
सदन में गूंजे जोर से,ताली की आवाज ||
विघटनकारी शक्तियां,कर गई अपना काम |
भेदभाव के बीज क्यों,बोते नियम तमाम ||
शालिनी शर्मा
[
बंजर भू के बीच में,उगा हुआ इक पेड़ |
कहे जिन्दगी गीत गा,राग खुशी के छेड़ ||
आश्रय सूखे पेड़ से, पाती नन्ही जान |
हरी पत्तियां गा रहीं,नये जीवन का गान ||
आंधी में भी है खड़ा, सूखा वृक्ष विशाल |
घर पक्षी का बन गई,उसकी सूखी ड़ाल ||
शालिनी शर्मा
[
सच को वो करने लगे,दफनाने का काम |
सौ झूठों से कह दिया,कर दो काम तमाम ||
शालिनी शर्मा
कितने घातक कर दिये,जीने के अधिकार |
उच्च वर्ग को मारते,बिन चाकू तलवार ||
शालिनी शर्मा
[
जनसंख्या कानून को,लागू करो जनाब |
संसाधन कम पड़ रहे,हालत बड़ी खराब ||
शालिनी शर्मा
[
भेदभाव को कर दिया,अब सुदृढ़ मजबूत |
पड़े मिलेंगे जेल में,काबिल सभी सपूत ||
शालिनी शर्मासपूत
जातिवाद से बढ़ रहा द्वेष,घृणा का बीज,
मत काबिल से छीन कर,दो अपात्र को चीज ||
शालिनी शर्मा
[
नींद उजाड़ दई जनता की, भारत में तूफान उठायो,
यूजीसी के एक्ट को देखो, भेद भरा ये विष फैलायो,
बामन, ठाकुर,वैश्य के बच्चों पे ही क्यों बस दोष लगायो,
आखिर किस दुर्भाव के कारण सामाजिक ये बैर बढ़ायो ||
शालिनी शर्मा
[
211 211 211 211 211 211 211 211
बांट रहे सत्ता अपनों को,वारिस को पद लाभ दिलाया,
राज वसीहत में अब देंगे, घरवाली को ताज चढ़ाया,
नीति अनीति यहां सब जायज, ताज की पोशी का स्वांग रचाया,
लायक का अपमान किया, तन हार गले मूर्ख पहनाया ||
शालिनी शर्मा
सोते सोते उमर गुजारी,और सभी कुछ गवां दिया
आँख खुली तो रोते रोते,बदनसीबी है बता दिया,
बैसाखी की आदत जिनको,कैसे भला वो दोड़ेगें
गूंगे बहरे सुने न बोले,क्यों फिर इनको जगा दिया
शालिनी शर्मा
[
साहिब कैसा कर दिया,भारत का माहोल |
बच्चा बच्चा कह रहा,और न नफरत घोल ||
शालिनी शर्मा
[
राजनीति के मंच से, खेल रहे हैं खेल |
वोट साधने के लिए,खत्म कर दिया मेल ||
शालिनी शर्मा
अब विपक्ष को मिल गया, मनचाहा हथियार |
कुएं गर्त के बीच में, है मोदी सरकार ||
यूजीसी के ये नियम हमें नहीं स्वीकार |
भेदभाव और बैर का बढ़ा रहे आकार ||
शालिनी शर्मा
मेरे आंसू कुछ कहते हैं समझो इनकी भाषा को
ये बहते हैं तब जब मन खो देता है हर आशा को
जिन्हे दर्द देने में आता मजा, घाव वो छीलेगे
अगर दर्द को समझ सको तो कर दो दूर हताशा को
शालिनी शर्मा
मत सिस्टम से प्रश्न कर,कुछ मत रख अरमान |
जिन्दा रहने के लिए,बन जा तू नादान ||
शालिनी शर्मा
आँख बन्द कर के रहो,कर लो बन्द जुबान |
कानो से भी मत सुनो, पथ होगा आसान ||
शालिनी शर्मा

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