शालिनी शर्मा की कविता
कहे प्यार का ये दिवस नफरत कर दो बन्द
जिन्हे चाहते हो कहो उनसे मन के भाव
और सुना तो मीत को कोई प्यार का छन्द
शालिनी शर्मा
पुलवामा के वीर शहीदों नमन तुम्हे है देश का,
स्वीकारो तुम नमन हिन्द के हरघर सभी प्रदेश का,
प्रश्न पूछती हैं गाथायें वीरो के बलिदान की,
कैसे बारूदी वाहन को रस्ता मिला प्रवेश का
शालिनी शर्मा
नेता अपना ही जीवन बस यहाँ सुरक्षित करते हैं,
यहाँ पे जनता और सैनिक बेमौत हमेशा मरते हैं,
आम नागरिक की गिनती बस वोट की खातिर होती है
संसद के ये लोग न मनमानी करने से डरते हैं
शालिनी शर्मा
जो मरने से ड़र जाये वो कभी नहीं जी सकता है,
बिना हौंसलो के क्या व्यक्ति जीवन विष पी सकता है,
फूल गुलाब सिखाते हैं कांटो के संग हँस कर रहना,
जिन्हे घाव सहने आते हैं वही इन्हे सी सकता है ||
शालिनी शर्मा
कैसे उसपर कर लिया,तुमने फिर विश्वास |
तुम्हे मिटाने का किया,जिसने सदा प्रयास
किया भरोसा आपने,उस पर क्यों हर बार |
जिसने हर दम आपकी,अर्थी की तैयार ||
जिसको समझा था कभी,सदा भरोसेदार |
वही हमारे राज को ,खोल रहा बाजार ||
कभी भरोसा मत करो,उस व्यक्ति पर आप |
सदा करे जो आपकी,तारीफो का जाप ||
शालिनी शर्मा






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