शालिनी शर्मा की कविता
दोहे
मन्जिल
ठोकर खाकर भी उठा,हार न थी मंजूर |
तेज भाग कर मिल गयी ,मंजिल जो थी दूर ||
एक पैर जब कट गया,हुआ न वो कमजोर |
एक पैर से भी चला,वो मंजिल की ओर ||
मन्जिल उसको ही मिली,जिसको इसकी चाह |
जिसने बाधा,शूल की ,कभी न की परवाह ||
लक्ष्य भेदने के लिए,हासिल कर तरकीब |
कर प्रयास कुछ और,है,मंजिल बहुत करीब ||
शालिनी शर्मा
02.04.2026. को शुभ दिन हनुमान जयन्ती पर रजिस्ट्री
जन्मदिवस हनुमान का,हर्षित सीता राम |
बिगडे़ काम संवारता,है हनुमत का नाम |
भक्त अनोखा हो गया,सिया राम का दास
राम राम बस ये जपे, हर दिन सुबहो शाम
शालिनी शर्मा
ट्रम्प लालची हो गये,किया विश्व का नाश ,
आग और बारुद से,भेद रहे आकाश ||
हर व्यक्ति को चाहिए,धन,कीर्ति सम्मान |
पर महनत से त्याग से,बने यहाँ पहचान ||
शालिनी शर्मा
लड़की को पढने नहीं, देते हैं कुछ लोग |
पर शिक्षित लडकी करे,सभी जगह सहयोग ||
शालिनी शर्मा

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