दोहे पर्यावरण दिवस

शालिनी शर्मा की कविता
अगर बनाना है हमें,प्यार भरा संसार।
बच्चों को मत दीजिए,नफरत के हथियार।।

जीव आपसे पूछते,कैसा हमसे प्यार।
पाल पोस कर भी हमें,क्यों तुम देते मार।।

आने वाली नस्ल का,रख लो थोड़ा ध्यान।
स्वच्छ हवा दे दो इन्हे,दे दो बस मुस्कान।।

कभी सोच कर देखिए,भूमि का उपयोग।
गमलों में सो कर भला,क्या खायेंगे लोग।।

धोखा देकर कर रहे,सारे नेता राज।
मुद्दों से भटका रहे,जनता की आवाज।।

बिके हुए ये लोग हैं,बिके हुए किरदार।
मकसद इनका है यही,दो भारत को मार।।

हर घर हो बगिया यहाँ,मधुबन हो हर धाम।
भूख मिटाने के लिए, करो खेत में काम

कुदरत कर लेती सदा,अपना खुद निर्माण।
छेड़छाड़ से देखिए,आये दुष्परिणाम।।

अपने जीवन की यहाँ,करिये खुद परवाह।
इन वृक्षों को काट कर,मत लो उनकी आह।।

रोज लगाना चाहिए,घर में पौधा एक।
रजनीगंधा बोइये,इसके लाभ अनेक

सिर्फ एक दिन के लिए,क्योंकर के ये नेग।
रोज बात कर पेड़ से,समझो भावावेग।।

खुशहाली का मन्त्र है,हो जीवन में चैन।
पास पेड़ के बस रहो,दिन हो चाहें रैन।।

पेड़ों के संग कीजिए,थोड़ा समय व्यतीत।
जहाँ भी भूमि देख लो,उगा दो उसमें मीत।।
                  शालिनी शर्मा
                 शालिनी शर्मा

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