दोहे शालिनी शर्मा

शालिनी शर्मा की कविता


 मिटा दिया कौटिल्य ने,नन्द वंश का राज।
अपमानित हो दे दिया,मौर्य वंश को ताज।।

जिसने जब जब भी किया,गुरूओं का अपमान।
कभी नहीं वो पा सका,इस दुनिया में मान।।

अगर किसी चाणक्य का,हुआ कहीं अपमान।
नन्द वंश की ही तरह,छिनती है पहचान।।

धनानन्द को जब हुआ,पद का बहुत गुरूर।
विष्णु गुप्त ने कर दिया,उसे ताज से दूर।।

एक गुरू ने कर दिया,इक शासन का अन्त।
मिटा दिया कौटिल्य ने,एक बड़ा धनवन्त।।
                  शालिनी शर्मा

                                  शालिनी शर्मा







गीतिका
कहीं मिले जो छोटा बच्चा,उसको तू मुस्कान दे
खोल के ‌‌पिंजरा पंछी को तू  ऊंची खूब उड़ान दे

वृद्ध आश्रम में कोई बूढ़ा व्यक्ति न जा पाये
हर बूढ़े व्यक्ति के अनुभव को थोड़ा सम्मान दे

सब जीवों को जीने का अधिकार मिले इस धरती पर
बेजुबान भी खाना खाये इस पर थोड़ा ध्यान दे

सड़क किसी भी व्यक्ति का न बिस्तर और बिछौना हो
अगर हैं साधन पास तेरे बेघर को एक मकान दे

एक दूसरे की पीड़ाएं समझे हर इन्सान यहाँ
कष्ट किसी को इस धरती पर कोई न इन्सान दे

छोटी छोटी खुशियों में ही मिलता है आनन्द यहाँ
इन छोटी खुशियों को ही तू एक बड़ी पहचान दे
                शालिनी शर्मा


आंगन में चुप चुप खड़ा,बूढ़ा पीपल पेड़।
कहे समय से क्या मिटा,मत किस्सा ये छेड़।।

नयी नस्ल बर्बाद है,खत्म हो गया प्यार।
भाई भाई के बीच है,नफरत की दीवार।।

छोटे बच्चे पी रहे,बीड़ी और शराब।
भूख गरीबी बढ़ गई,हालत बड़ी खराब।।

गाय भैंस सब बिक ग‌ई,खेत हुए नीलाम।
मालिक करने लग गये,मजदूरी का काम।।

गौरैया  आती  नहीं,  अब पीपल के पास।
सभी खगो को खा गया,ये बेरहम विकास।।

ताल तलैया  सूख कर,  बढ़ा  रहे हैं प्यास।
पीपल रोता, देखकर,छिनता धरा लिबास।।
                   शालिनी शर्मा

राजा   तेरी   बोलती, किस कारण है बन्द।
किस कारण से ट्रम्प की, निन्दा नहीं पसन्द।।

तीन भारतीय नाविकों,की हत्या पर बोल।
यूएस के दुष्कृत्य पर,एक बार  मुंह खोल।।

 नकली चीजें दी हमें,करने को उपयोग।
फलों सब्जियों की जगह,उगा दिये उद्योग।

उद्योगों ने कर दिया,हरियाली का नाश।
ये विकास बस कर रहा,पर्यावरण विनाश।।
                    शालिनी शर्मा

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