शालिनी शर्मा की कविता
एक गुरू ने कर दिया,इक शासन का अन्त।
मिटा दिया कौटिल्य ने,एक बड़ा धनवन्त।।
                                    
मिटा दिया कौटिल्य ने,नन्द वंश का राज।
अपमानित हो दे दिया,मौर्य वंश को ताज।।
                                  शालिनी शर्मा


आंगन में चुप चुप खड़ा,बूढ़ा पीपल पेड़।
कहे समय से क्या मिटा,मत किस्सा ये छेड़।।

नयी नस्ल बर्बाद है,खत्म हो गया प्यार।
भाई भाई के बीच है,नफरत की दीवार।।

छोटे बच्चे पी रहे,बीड़ी और शराब।
भूख गरीबी बढ़ गई,हालत बड़ी खराब।।

गाय भैंस सब बिक ग‌ई,खेत हुए नीलाम।
मालिक करने लग गये,मजदूरी का काम।।

गौरैया  आती  नहीं,  अब पीपल के पास।
सभी खगो को खा गया,ये बेरहम विकास।।

ताल तलैया  सूख कर,  बढ़ा  रहे हैं प्यास।
पीपल रोता, देखकर,छिनता धरा लिबास।।
                   शालिनी शर्मा

राजा   तेरी   बोलती, किस कारण है बन्द।
किस कारण से ट्रम्प की, निन्दा नहीं पसन्द।।

तीन भारतीय नाविकों,की हत्या पर बोल।
यूएस के दुष्कृत्य पर,एक बार  मुंह खोल।।

 नकली चीजें दी हमें,करने को उपयोग।
फलों सब्जियों की जगह,उगा दिये उद्योग।

उद्योगों ने कर दिया,हरियाली का नाश।
ये विकास बस कर रहा,पर्यावरण विनाश।।
                    शालिनी शर्मा

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