शालिनी शर्मा की कविता
भूखे मरने के लिए,रहें सभी तैयार।
उपजाऊ भूमि पे वो, दौड़ाएंगे कार।।
युवा देश का जागकर,करने लगा सवाल।
कर्ज मांग कर कब तलक,दोगे रोटी दाल।।
नल में मल को देख कर,रोने लगे शहीद।
अच्छे दिन आयें कभी,करते हैं उम्मीद।।
ई कोली बैक्टीरिया,करता है बीमार।
स्टेशन पर रेल के,नल में जल बेकार।।
पीने को पानी नहीं,रोते देख शहीद।
जल संकट सिर पर खड़ा,पी तू इसे खरीद।।
जब पीने को जल न हो,आंसू पीना सीख।
जनता तरसे बूंद को,मांगे जल की भीख।।
नल में मल को देख कर,रोने लगे शहीद।
अच्छे दिन आयें कभी,करते हैं उम्मीद।।
शालिनी शर्मा
बस वादो को खाइये,पियें नयन का नीर।
साफ हवा की बात का,विषय नहीं गम्भीर।।
जंगल और पहाड़ सब,रोकर करें पुकार।
हमें नोंच वो खा रहे,देखो क्षय है द्वार।।
शालिनी शर्मा
गजल
2122 1122 1122 22/112
जाग के रातों को नीर बहाते क्यों हो।
आप लिख कर उसका नाम मिटाते क्यों हो।।
बात दिल की कह दो,कब तक शरमाओगे।।
प्रेम करते हो तो प्रेम छिपाते क्यों हो।।
प्यार में दोनों को ही झुकना पड़ता है।
आप ही उसको हर बार मनाते क्यों हो।।
जब तुम्हें गम से उसके कोई सरोकार नहीं।
फिर यह झूठी हमदर्दी दिखाते क्यों हो।।
वो तुम्हें कुचलने की करता है साजिश।
फेंक कर जो दे सिक्के तुम उठाते क्यों हो।।
पीठ में खंजर क्यों भोंक दिया है तुमने।
दोस्ती में छल का जहर मिलाते क्यों हो।।
शालिनी शर्मा


















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