गीतांजलि काव्य प्रसार मंच गाजियाबाद ईकाई


गुलमोहर पार्क शालीमार गार्डन extn 1  पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया आयोजन बहुत सफल रहा कुछ छाया चित्र प्रेषित हैं जो काव्य गोष्ठी की भव्यता को प्रदर्शित करने के लिए काफी है सभी साहित्यकारों ने बहुत सुन्दर अपनी श्रेष्ठ रचनाओं का काव्यपाठ करके श्रोताओं का मन मोह लिया तस्वीरें खींचने वालों को भी शुभकामनाएं 
अगर तस्वीरें पसन्द आयी हों तो कमेन्ट करके अवगत करायेंगे













































कैसा आ गया स्वराज अरे र र र र र र बाबा 
करती महंगाई राज अरे रे रे रे रे बाबा 
तू क्यों रोता है चूल्हे 
वह तुझे जलाना भूले
जब घर में नहीं अनाज अरे रे रे रे रे रे बाबा 

ये लाल टमाटर हाय
महंगे हैं कैसे खाएं 
फिर महंगा हो गया प्याज अरे रे रे रे रे रे बाबा

हम आम नागरिक सारे 
चिल्ला चिल्ला कर हारे
कोई सुने नहीं आवाज अरे रेरेरेरे रे बाबा 

निधन रोगों से हारा 
तड़पे मरता बेचारा 
महंगा है बहुत इलाज करे रेरेरेरेरे बाबा

मासूम कली मुरझाए 
वो बाग कहां से लाए 
जहां रहे सुरक्षित लाज अरे रेरेरेरेरे बाबा 

 कलियां खिलने से डरती 
 बे मौत कोख में मरती
 कोई नहीं उठाता नाज अरे रे रे रे रे रे बाबा 

कुर्सी मिलते ही नेता 
ठेंगा ही हमको देता 
यह करे न कोई काज अरे रे रे रे रे रे बाबा 

कुछ नेता जब मुंह खोले
 गंदी भाषा ही बोले
 नारी का नहीं लिहाज अरे रे रे रे रे रे रे बाबा 

जब आप अदालत जायें
बस तारीखें ही पायें
धन का न्याय  मौहताज अरे रे रे रे रे रे बाबा
                      शालिनी शर्मा






 





 





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