बेटी की शादी की जितनी खुशी होती है उतना दुख भी होता है कभी कभी मन करता है कि पूछूं बेटिया पर गय
क्यों होती हैं शादी के बाद बेटी पर हमारा अधिकार कहां रह जाता है सभी की तरह मैने भी बेटी विदा की है और भगवान से प्रार्थना की है कि उसे इतनी खुशी मिले जितनी की कभी हम भी नहीं दे पाये
नम आँखों में नीर है,पर मन में उल्लास |
विदा खुशी से हो रही,बेटी पाहुन पास ||
दो घर का तुम मान हो,दो घर की हो लाज |
संस्कार से धैर्य से, सब निपटाओ काज ||
ये दुल्हन खुश है बड़ी,पा निशान्त का साथ |
मात पिता भाई बहन, खड़े हैं खाली हाथ ||
सास ससुर की बात का,रख लेना तुम मान |
हां जी हां जी बोलकर,मुख रखना मुस्कान ||
नव रिश्तों का हर समय,रखना हरदम ध्यान
जेठ - जेठानी, नन्द को,देना तुम सम्मान ||
दो घर का तुम मान हो,दो घर की हो लाज |
संस्कार से, धैर्य से, सब निपटाना काज ||
पावन विधियों से सभी,निपट गये सब काम |
बेटी को कई मिल गये,नये रिश्तों के नाम ||
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